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गर्लफ्रेंड के साथ उसकी बहन


प्रेषक : सिद्द …
हैल्लो दोस्तों, में सिद्द एक बार फिर से आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों की लिए अपनी सच्ची घटना को लेकर आया हूँ। दोस्तों आप सभी की तरह मुझे भी सेक्स करना और सेक्सी कहानियों को पढ़ना बहुत अच्छा लगता है। दोस्तों मेरी एक बहुत सुंदर गर्लफ्रेंड है, जिसके साथ मेरा चक्कर बहुत दिनों से चल रहा है। में उसके साथ बहुत बार इधर उधर घूमने फिरने जा चुका हूँ क्योंकि हम दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करते है, इसलिए मुझे उसके साथ रहना और अपना हर समय उसके साथ बिताना बहुत अच्छा लगता है और उसका भी ठीक यही हाल है। दोस्तों यह मेरी आप सभी की सेवा में पहली सच्ची कहानी है। दोस्तों में अपनी गर्लफ्रेंड शेफाली से मिलने उसके घर पर चला गया, मैंने देखा कि उस समय उसकी छोटी बहन श्रुति जो कि 17 साल की थी, वो भी उस समय वहीं थी। मैंने देखा कि वो लड़की बहुत ही सुंदर और सेक्सी थी। दोस्तों मेरी अच्छी किस्मत से उस दिन मेरी गर्लफ्रेंड अपनी बहन के साथ अकेली थी उसकी माँ दो दिनों के लिए कहीं बाहर गई थी। फिर कुछ देर हमारे साथ बैठकर बातें करने के बाद वो मुझे और उसकी बहन शेफाली को अपने घर में अकेला छोड़कर वो खुद बाहर से दरवाजे को ताला लगाकर अपनी एक दोस्त के पास चली गयी।फिर उसके चले जाने के बाद तुरंत ही खुश होकर मैंने आगे बढ़कर शेफाली को अपनी बाहों में भरकर उसके नरम गुलाबी होंठो को चूमना शुरू कर दिया और वो भी मेरा पूरा पूरा साथ देने लगी। अब वो अपनी जीभ को मेरे मुहं में डालकर मुझसे चुसवा रही थी। उस समय हम दोनों बहुत मस्ती जोश में थे और फिर उसने अपनी जीभ से मेरे होंठो को चाटना चूसना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से मुझे बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था। फिर मैंने कुछ देर बाद सही मौका उसका मूड देखकर उसके मुलायम बड़े आकार के बूब्स को दबाना शुरू कर दिया, मुझे उसके रुई की तरह मुलायम बूब्स को दबाने और उनका रस निचोड़ने में बड़ा मज़ा और अजीब सी ख़ुशी मिल रही थी और फिर उसने भी कुछ देर बाद जोश में आकर मेरे लंड को अपने मुलायम हाथ से पकड़ लिया और वो पेंट के ऊपर से ही मेरे लंड को सहलाने लगी, जिसकी वजह से हम दोनों ही अब मज़े मस्ती के समुद्र में गोते लगा रहे थे। अब मैंने बिना देर किए उसकी टी-शर्ट को भी उतार दिया और खुश होकर में उसके बूब्स से खेलने लगा था। मैंने उसके दोनों गोलमटोल बूब्स को अपने हाथों से सहलाना और उनको मसलना शुरू कर दिया और थोड़ी ही देर में हम दोनों के सारे कपड़े उतार चुके थे।
फिर वो कुछ देर के बाद नीचे बैठकर मेरा लंड चूसने लगी थी और मेरे लंड के टोपे को वो अपनी जीभ से चाटने चूसने लगी। वो किसी अनुभवी रंडी की तरह मेरे लंड को लोलीपोप की तरह चूस रही थी जिसकी वजह से मुझे बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था। फिर मैंने भी कुछ देर बाद नीचे आते हुए उसकी चूत पर अपना मुहं लगा दिया, में उसकी रसभरी चूत को चूसने लगा और अपनी जीभ से चूत के दाने को सहलाने लगा, जिसकी वजह से वो मज़े जोश में आकर सिसकियाँ लेने लगी। उसके मुहं से अब ऊउफ़्फ़्फ़ स्सीईईईइ ऊह्ह्ह्ह की आवाजे लगातार आने लगी थी और थोड़ी देर तक में उसकी चूत को चाटने के साथ ही अपनी जीभ से उसकी चुदाई भी करने लगा था और उसकी चूत का रस पाने लगा था। फिर कुछ देर के बाद मैंने अपना लंड उसकी गांड में जबरदस्ती डाल दिया। में उस समय बहुत जोश में था इसलिए मैंने बिना कुछ सोचे समझे एक ही जोरदार धक्के में अपने लंड को पूरा उसकी गांड में पहुंचा दिया। अब मेरे ऐसा करने की वजह से उसके मुहं से एक बड़ी तेज चीखने की आवाज निकली और हम दोनों को हल्का हल्का सा दर्द मज़ा भी आने लगा था।
अब में कुछ देर उसके बूब्स को सहलाकर उसके दर्द कम होने शांत होने का इंतजार करने लगा और जब वो शांत हुई तो उसके बाद में मस्ती से उसकी गांड में अपने लंड को धीरे धीरे अंदर बाहर करके उसकी गांड मार रहा था और वो भी अब मस्ती में आकर अपने कूल्हों को हिलाते हुए मुझसे अपनी गांड मरवा रही थी। अब हम दोनों को उस काम को करने में बहुत मज़ा आने लगा था, तभी दरवाज़ा खुला और श्रुति अंदर आ गयी। अब हम दोनों डर गये, लेकिन वो अंदर आकर हमारे सामने ही खड़ी होकर अपने एक हाथ से अपनी चूत को सहलाने लगी थी। फिर उसने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए मुझसे कहा कि थोड़ा सा तुम दोनों मेरा भी तो ध्यान रखो, वरना में मम्मी को यह सब बता दूँगी। दोस्तों उस समय मेरा लंड शेफाली की गांड से बाहर था। मैंने श्रुति के अचानक से आ जाने की वजह से डरते हुए लंड को बाहर निकाल लिया था, जो अब भी वैसे ही अधूरे मज़े लेकर तनकर खड़ा हुआ था। अब श्रुति आगे बढ़ी और वो मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर देखने लगी और फिर उसने मेरे लंड को अपने मुलायम हाथ से सहलाना शुरू कर दिया। दोस्तों उसके ऐसा करने की वजह से अब हम दोनों का वो डर धीरे धीरे खत्म हो गया था।

अब श्रुति ने बिना देर किए मेरा लंड अपने मुहं में ले लिया और वो चूसने लगी, जिसकी वजह से मुझे वाह क्या मस्त मज़ा आ रहा था। फिर शेफाली ने भी हमारे पास आकर श्रुति के सारे कपड़े उतार दिए, जिसकी वजह से अब हम तीनों एक दूसरे के सामने थे और में मन ही मन बहुत खुश था, क्योंकि मुझे आज पहली बार में एक साथ दोनों बहन के साथ इतना सब करने का मौका जो मिल गया था। दोस्तों में कुछ देर से लगातार शेफाली की गांड को धक्के मार रहा था और उसके बाद अब श्रुति का मेरे लंड को चूसना और दस मिनट में ही मेरा लंड श्रुति के मुहं में ही झड़ गया और वो उसको चाटकर पीने लगी। तभी शेफाली ने अपनी जीभ को उसके मुहं में डाल दिया और अब वो दोनों मेरे लंड का पानी एक दूसरे के मुहं से चाटने पीने लगी थी। फिर मैंने कुछ देर बाद श्रुति को लेटाकर उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया और वो मस्ती की वजह से पागल होकर मेरे सर को मेरी चूत पर दबाने गयी थी और अब शेफाली ने मेरा लंड अपने मुहं में लेकर उसको चूसना शुरू कर दिया। फिर कुछ देर चूत को चूसने चाटने के बाद श्रुति की चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया और में उसका पानी पीने लगा था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।
फिर मैंने उठना चाहा, लेकिन श्रुति ने मुझसे अपनी चूत को और कुछ देर चाटने को कहा तो में दोबारा से उसकी कामुक चूत को चाटने लगा और फिर शेफाली ने उठकर अपनी चूत को अपनी छोटी बहन श्रुति के मुहं पर रख दिया। फिर थोड़ी देर के बाद में अपना लंड श्रुति की चूत पर रगड़ने लगा था, जिसकी वजह से वो पागल हो उठी। अब उसने मुझसे कहा कि अंदर भी डालो ना, तुम क्यों मुझे इतना तरसा रहे हो? फिर मैंने हल्का सा ज़ोर लगाया, जिसकी वजह से मेरा लंड श्रुति की गीली कामुक चूत में थोड़ा सा अंदर चला गया और वो दर्द की वजह से ज़ोर से चिल्ला उठी ऊईईईई माँ मर गई ऊउफ़्फ़्फ़्फ़ मुझे बड़ा तेज दर्द हो रहा है आह्ह्ह मुझे ऐसा लग रहा है कि में इसकी वजह से मर ही जाउंगी। फिर उसी समय शेफाली ने अपना एक बूब्स श्रुति के मुहं में डाल दिया और वो मेरे होंठो को चूमने लगी और फिर जब थोड़ी देर के बाद उसका दर्द थोड़ा सा कम हुआ। फिर मैंने एक बार फिर से ज़ोर लगाया, जिसकी वजह से अब मेरा आधा लंड उसकी चूत में जा चुका था और उसकी कुंवारी छोटी चूत से खून भी बहने लगा था, वो दर्द की वजह से बिन पानी की मछली की तरह तड़प रही थी। फिर में कुछ देर ऐसे ही पड़ा रहकर उसके होंठो को चूमने लगा था और थोड़ी देर के बाद वो अपनी कमर को हिलाने लगी थी।
अब मैंने फिर से ज़ोर लगाया और मेरा पूरा लंड उसकी मुलायम चूत को धक्के देते हुए उसको फाड़ता हुआ अंदर चला गया, जिसकी वजह से वो दोबारा से तड़पने लगी, लेकिन थोड़ी ही देर वो अपनी गांड को हिलाने लगी। फिर में भी अब धीरे धीरे अपने धक्को की स्पीड को बढ़ाने लगा और उधर शेफाली अपनी बहन से अपनी चूत को चटवा रही थी। अब श्रुति भी मज़े और जोश की वजह से अपनी गांड को मेरे हर एक धक्के के साथ ऊपर उठा उठाकर मुझसे अपनी चुदाई के मज़े ले रही थी और में धक्के देते हुए शेफाली के बूब्स को दबाते हुए श्रुति की चूत में अपने लंड को अंदर बाहर करके उसकी चुदाई के मज़े ले रहा था। फिर थोड़ी देर लगातार धक्के देने के बाद मैंने अपना लंड श्रुति की चूत से बाहर निकालकर शेफाली के मुहं में दे दिया। अब श्रुति मेरे ऐसा करने की वजह से बड़ी बेचैन हो गयी, वो मुझसे कहने लगी कि तुमने इसको मेरे अंदर से क्यों निकाल लिया, प्लीज और करो ना मुझे बहुत मज़ा आ रहा है। फिर मैंने उसको कहा कि तुम ज़रा कुछ देर रुक जाओ, में पहले कुछ देर अपने लंड को चुसवा लेता हूँ उसके बाद दोबारा इसको में तुम्हारी चूत में डाल दूंगा।
फिर कुछ देर अपने लंड को वापस मैंने शेफाली के मुहं से बाहर निकालकर श्रुति की चूत में डाल दिया और में ज़ोर से धक्के देकर उसको चोदने लगा था और वो भी मस्ती में आकर मुझसे चुदाई करवाते हुए चिल्ला रही थी, हाँ और ज़ोर से करो, ऊफ्फ्फ हाँ ऐसे ही पूरा अंदर जाने दो, आह्ह्ह मुझे बड़ा मज़ा आ रहा है। फिर कुछ देर के बाद वो झड़ गयी और उसका जोश अब ठंडा हो चुका था, इसलिए वो शांत हो गयी। अब शेफाली नीचे मेरे सामने लेट गयी और मैंने उसकी चूत में अपने लंड को डाल दिया और अब में शेफाली की चूत को तेज तेज धक्के मार रहा था और श्रुति उससे अपनी गांड को चटवा रही थी। फिर थोड़ी देर वैसे ही चुदाई करने के बाद मैंने अपने लंड को शेफाली की चूत से बाहर निकाल लिया और श्रुति की गांड पर मैंने अपने लंड को हाथ में लेकर हिलाते हुए सारा गरम वीर्य निकाल दिया और शेफाली ने वो सारा वीर्य अपनी जीभ से चाटकर साफ कर दिया। दोस्तों हम तीनों अब तक बहुत चुके थे और फिर हम तीनों ने साथ में बैठकर खाना खाया। उस समय हम सभी नंगे ही थे और अब शेफाली हमारे लिए आईसक्रीम ले आई। अब मैंने अपनी आईसक्रीम को शेफाली की गांड पर लगाया और थोड़ा मैंने श्रुति की गांड पर भी लगाई। उसके बाद मैंने बारी बारी से उन दोनों की गांड को चाटना शुरू किया।
दोस्तों उन दोनों की गांड के छेद का स्वाद इतने मस्त था कि उनको छोड़ने का मेरा मन ही नहीं कर रहा था। फिर उन्होंने थोड़ी आईसक्रीम मेरे लंड पर लगाई और मैंने अपना लंड भी उनको चाटने के लिए कहा और वो दोनों चाटने लगी, आफ्फ्फ़ ठंडी आईसक्रीम और उन दोनों की गरम जीभ के मिले-जुले असर से में पागल हुआ जा रहा था और मुझे अब लगाने लगा था कि मेरा लंड फट ही जाएगा। फिर मैंने शेफाली को अपने सामने घोड़ी बनाया और उसकी गांड में मैंने अपने लंड को डाल दिया और में धक्के देते हुए श्रुति के बूब्स को चूसने लगा। फिर करीब बीस मिनट तक शेफाली की गांड में अपने लंड से धक्के मारने के बाद मैंने अपना लंड उसकी गांड से बाहर निकालकर श्रुति की गांड में डाल दिया। अब उसको बहुत दर्द हुआ, लेकिन थोड़ी देर के बाद वो खुद ही जोश में आकर चिल्लाते हुए मुझसे कहने लगी ऊफ्फ्फ्फ़ हाँ और ज़ोर से चोदो तुम मुझे, आह्ह्ह वाह मज़ा आ गया। फिर में भी बहुत तेज़ी से उसकी गांड में अपने को धक्के मार रहा था, थोड़ी देर के बाद मैंने अपना वीर्य श्रुति की गांड में ही निकाल दिया। फिर शेफाली ने तुरंत ही श्रुति को अपने मुहं पर बैठा लिया, जिसकी वजह से मेरा वीर्य उसकी गांड से निकालकर अब शेफाली के मुहं में गिरने लगा था।
फिर उन दोनों चुदक्कड़ बहनों ने मेरा सारा वीर्य मिल बाँटकर पी लिया। दोस्तों हम तीनों को ही उस खेल में बहुत मस्त मज़ा आया और मुझे उन दोनों कुंवारी बहनों की पहली बार जमकर चुदाई करके दुनिया की सबसे बड़ी ख़ुशी उस दिन ही मिल चुकी थी और उनके चेहरे से मुझे पता चल रहा था कि वो भी मेरी चुदाई की वजह से पूरी तरह संतुष्ट है ।।
धन्यवाद …