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दोस्त की भोली बीवी की जवान चूत

… : राकेश … , मेरा एक फ्रेंड था, जिसका नाम मोहन था, हम लोग उसे मोहन जी कहते थे। उसकी शादी गाँव में एक लड़की से कर दी थी। उसकी बीवी दिखने में सुंदर नहीं थी, लेकिन उसके बूब्स और गांड बहुत मस्त थे। अब वो अपनी बीवी को गाँव में ही छोड़कर मुंबई आ गया था और यहाँ पर एक औरत को पटाया था और उससे प्यार करता था। हम लोग एक साथ रहते थे और वो औरत बगल की बिल्डिंग में रहती थी। फिर थोड़े दिनों के बाद उसके घरवालों ने उसकी बीवी को मुंबई पहुँचा दिया, लेकिन वो उसे यहाँ भी अनदेखा करता था। उसकी बीवी बहुत ही भोली थी, गाँव की जो थी। मुझे उस पर दया आती थी, में उसे बहुत मानता था। अब वो मुझसे अपने पति के बारे में पूछती रहती थी, तो मुझे उसके भोलेपन पर दया आती थी।फिर मैंने सोचा कि चलो इसे सब सही-सही बता देते है तो मैंने उसे सब बता दिया। अब वो मुझसे उस औरत का घर पूछने लगी थी। तो मैंने उसे दूरबीन से उसका घर दिखा दिया और ये भी बता दिया कि आज रात में वो उसके घर जाने वाला है, तुम दूरबीन लेकर यही खड़ी रहो, वो जब आएगा तो पता चल जाएगा, तो उसने वैसा ही किया। अब रात के 10 बज रहे थे, फिर मोहन जी आए, तब तक में सो गया था। तो तभी अचानक से उसने मुझे जगाया और बोली कि देखो ना उस रूम में क्या कर रहे है? तो मैंने देखा कि मोहन जी उस औरत के बूब्स दबा रहे थे। तो तब में बोला कि तुम देखो, वो गंदे काम कर रहे है, तो वो दूरबीन लेकर देखने लगी। अब में उसके पीछे खड़ा था। तो तभी वो फिर से बोली कि देखिए ना वो क्या कर रहे है? आप उन्हें क्यों नहीं रोकते है? तो मैंने देखा तो मोहन जी उसका पेटीकोट कमर तक उठाकर उसकी चूत सहला रहे थे।अब मेरा भी लंड खड़ा हो गया था, अब मुझे भी मज़ा आने लगा था। अब में सोचने लगा था कि इसको ही चोद दूँ, लेकिन फिर सोचा कि नहीं ये ठीक नहीं है, यह मेरे दोस्त की भोली भाली बीवी है। फिर मुझे ख्याल आया कि उसकी गांड में अपना लंड थोड़ा सा सटा देता हूँ इससे तो कुछ होगा नहीं। तो में  अपना लंड उसकी गांड की दरार में सटाकर खड़ा हो गया और बोला कि इतनी गंदी हरकत में नहीं देख सकता। फिर उसने पूछा कि वो क्या कर रहे है? तो में बोला कि अब वो डालने वाले है। तो तब वो बोली कि क्या? तो तब मैंने उसको बताया कि उसकी चूत में लंड। तो वो मेरी बात नहीं समझी और फिर से पूछने लगी। तो मैंने उसको बताया कि तुम खुद देख लो, तो वो दूरबीन लेकर देखने लगी। अब इधर में भी उसकी गांड देखने के लिए उसका पेटीकोट और साड़ी ऊपर उठाने लगा था।…अब वो बोले जा रही थी कि ये तो सिर्फ़ अपनी बीवी के साथ किया जाता है, लेकिन ये पराई औरत के साथ क्यों कर रहे है? अब में उसकी बात पर ध्यान नहीं दे रहा था और उसकी साड़ी और पेटीकोट ऊपर उठाकर उसकी गांड में अपना लंड सटा दिया था। फिर तब मैंने सोचा कि थोड़ा सा पेल दूँ, लेकिन फिर मैंने उसको छोड़ दिया। तो तब वो बोली कि में ये बर्दाश्त नहीं कर सकती कि मेरा पति किसी और के साथ सोए। अब वो दूरबीन छोड़कर रोने लगी थी। फिर तब मैंने दूरबीन से देखा तो मोहन जी उसकी चूत में अपना लंड पेल रहे थे। अब मुझे उस पर बड़ी दया आ रही थी, लेकिन मेरा लंड मानने को तैयार ही नहीं हो रहा था। अब वो बेचारी रो-रोकर बेहोश हो गई थी। फिर तब मैंने कई बार सोचा कि इसकी चुदाई करूँ या ना, लेकिन अब में जवानी के आगे इंसानियत को भूल गया था और फिर उसकी चुदाई का प्रोग्राम बनाया, मेरी जगह पर कोई और रहता तो वो भी यही करता। ये कहानी आप डॉट कॉम पर पड़ रहे है।फिर मैंने उसे बिस्तर पर सीधा लेटा दिया और सोचा कि नंगा करके चोद दूँ, लेकिन फिर दिमाग में आया कि शमीज सलवार रहता तो े के बाद पहना देता, लेकिन साड़ी कौन पहनाएगा? तो तब मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट को उसकी कमर तक उठा दिया, उसकी गांड बहुत मस्त थी। फिर में उसकी गांड पर अपना लंड लगाकर बहुत देर तक सोता रहा, तो तभी मुझे ख्याल आया कि अगर यह होश में आ गई तो में इसकी गांड भी नहीं मार पाऊंगा, इसलिए मैंने थोड़ा थूक लगाकर अपना लंड उसकी गांड से लगा दिया और उसको े लगा। फिर बड़ी मुश्किल से मेरा लंड थोड़ा सा अंदर घुसा था, में उसको जबरदस्ती नहीं ा चाहता था, क्योंकि वो कही जाग जाती तो कुछ नहीं होता। अब जो घुसा था, वो भी बाहर निकालना पड़ रहा था। फिर जब मुझे लगा कि गांड में घुसाना मुश्किल है तो मैंने अपना लंड उसकी गांड से बाहर निकाल लिया।अब मैंने उसे पीठ के बल सुला दिया था और उसकी साड़ी को ऊपर उठाया, ताकि उसकी चूत दिख सके।  उसकी चूत बहुत मस्त थी, उसकी चूत पावरोटी की तरह फूली हुई थी। फिर मैंने उसकी चूत पर थोड़ा थूक लगाकर अपना लंड लगाया और मेरा लंड थोड़ा अंदर घुसाया तो मेरा लंड आसानी से उसकी चूत में घुस गया। तो तब मुझे लगा कि मोहन जी ने थोड़ी चुदाई जरूर की होगी, मेरा लंड उनके लंड से बहुत बड़ा था इसलिए थोड़ा सा घुसा था, लेकिन बाद में घुस ही नहीं रहा था। अब मुझे बहुत जोश आ गया था। अब मैंने सोच लिया था कि धीरे-धीरे करके पूरा डालूँगा और फिर मैंने वैसे ही किया और अपना पूरा लंड पेलकर उसको े लगा था और सोचा कि उसके जागने पर जो होगा देखा जाएगा, आखिर ये भी तो जवान है। अब मैंने उसे पूरी तरह से नंगा कर दिया था और उसको जोर-जोर से े लगा था, लेकिन वो जागी नहीं थी। अब मुझे विश्वास हो गया था कि इसे अच्छा लग रहा है इसलिए में मेरा पूरा लंड बाहर निकालकर फिर से पूरा पेल रहा था और फिर थोड़ी देर के बाद अपना बीज उसकी चूत में ही गिरा दिया और अपने कपड़े पहनकर सो गया था।अब मुझे उसकी चुदाई करने में मज़ा आ गया था। फिर मैंने उसे उठाकर उसके बेड पर सुला दिया, उसकी सारी चीज़े नंगी थी और उसकी चूत तो फूल गई थी। फिर कुछ देर के बाद मैंने छुपकर देखा, तो वो अपनी चूत साफ़ करके अपना पेटीकोट बाँध रही थी। फिर उसके बाद उसका पति आ गया तो उसने जाकर दरवाजा खोला और उसने कुछ नहीं बताया, लेकिन वो सुबह बोल रही थी कि मुंबई के लोग बहुत बुरे होते है। फिर मुझे जब कभी भी कोई मौका मिला तो मैंने उसकी खूब चुदाई की और खूब मजा किया ।।धन्यवाद ……