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बॉस की बीवी को दबोचा

… : अरुण … , मेरा नाम अरुण है। में नियमित पाठक हूँ। आज में आपको एक वाक्या सुनाने जा रहा हूँ, जो 5 साल पुराना है। में एक कोचिंग क्लास में क्लर्क का काम करता था, मुझे सुबह 6 बजे क्लास खोलनी पड़ती थी। फिर मेरे बॉस पूजा करके क्लास में पढ़ाने चले जाते थे और फिर में उनके घर पानी लेने जाता था, अब ये मेरा रोज का काम था। बॉस की बीवी निर्मला भाभी को में भाभी कहकर बुलाता था, वो बड़ी सुंदर थी, हाईट 5 फुट 2 इंच, गोरा रंग, लंबे बाल और 36 साईज के बूब्स थे, उनकी कमर पतली और गांड चौड़ी थी। अब में जब भी उनके घर जाता था, तो में उनको देखता रहता था। अब वो भी मुझसे घुलमिल गयी थी। अब में ऑफिस आकर भाभी के बारे में सोचकर कभी-कभी मुठ भी मार लेता था।फिर एक दिन जब में सुबह पानी लेने घर गया तो मैंने देखा कि दरवाजा खुला था। फिर में अंदर चला गया। अब भाभी मुझे कही नहीं दिख रही थी तो तब मैंने सोचा कि किचन में होगी। अब में किचन में जा रहा था, तो बीच में बेडरूम का दरवाजा खुला था, तो मेरी नजर सीधी अंदर गयी तो मैंने देखा कि भाभी नाहकर आई थी। अब वो सिर्फ़ टावल लपेटे हुए थी। फिर तभी उन्होंने मुझे भी देखा और मेरी तरफ स्माईल की और दरवाजा बंद कर लिया। फिर थोड़ी देर के बाद वो साड़ी पहनकर बाहर आई। अब मेरा लंड लगभग टाईट हो गया था, उन्होंने ये बात नोटीस की थी। फिर उन्होंने मुझे पानी भर दिया और में क्लास पर वापस आ गया। फिर दोपहर में बॉस ने कहा कि घर से फाईल लानी है। तो तब में घर गया, तो भाभी ने दरवाजा खोला।अब धूप बहुत होने की वजह से मुझे पसीना आ रहा था। तो तब भाभी ने कहा कि अंदर आ जाओ, पानी पी लो, थोड़ी देर बैठ जाओ, तो में अंदर चला गया। फिर भाभी पानी लेकर आई। अब में पानी पी रहा था, तो तब भाभी मुझे ही देख रही थी। फिर थोड़ी देर के बाद वो फाईल और 2 गिलास में शरबत लेकर आई और 1 गिलास मुझे दिया। अब में शरबत पीते-पीते उनकी तरफ देख रहा था, उनके ब्लाउज में से उनकी चूचीयाँ बाहर आ रही थी, उनके पेट में बल पड़ रहे थे। अब में यह सब देख रहा था, उन्होंने ये नोटीस किया था। फिर मैंने शरबत खत्म किया और फाईल लेकर जाने लगा तो तब उन्होंने मुझे पीछे से आवाज़ दी, सुनो अरुण। तो तब मैंने पीछे पलटकर कहा कि जी भाभी? तो तब उन्होंने मुझे बुलाया और पूछा कि अरुण में 2-3 दिन से कुछ नोटीस कर रही हूँ। तो तब मैंने कहा कि क्या भाभी? तो तब उन्होंने कहा कि क्या देखते हो मुझमें? मुझमे क्या अच्छा लगा? तो मैंने कुछ नहीं जवाब दिया और मुस्कुराकर वहाँ से चल दिया।फिर दूसरे दिन सुबह जब में पानी लेने गया, तो तब भाभी नाइटी पहने हुए थी। फिर मैंने पानी का जग उन्हें दिया और फिर में भी उनके पीछे किचन में चला गया। अब वो झुककर पानी भर रही थी। अब उनके बूब्स मुझे साफ-साफ नजर आ रहे थे। फिर तभी उन्होंने देखा कि में उनके बूब्स देख रहा हूँ, तो उन्होंने पूछा कि क्या देख रहे हो? कभी औरत की छाती देखी नहीं क्या? तो में शर्म से पानी-पानी हो गया और उनसे सॉरी कहा। तो तब उन्होंने कहा कि अरुण सॉरी मत कहो, तुम्हें अच्छा लगता है तो देखो, मुझे कोई प्रोब्लम नहीं है। तो तब मैंने कहा कि भाभी आप हो ही इतनी खूबसूरत कि में अपने आपको रोक नहीं पाता हूँ। तो तब भाभी ने कहा कि ठीक है, देखने के बाद क्या करते हो? कुछ करते भी हो या नहीं। अब में इसे भाभी का ग्रीन सिग्नल समझकर भाभी को अपनी बाँहों में लेकर चूमने लगा था। अब मैंने उन्हें दबोच लिया था, तो तब उन्होंने मुझसे छूटने के लिए मुझे धक्का दिया, लेकिन अब मैंने उन्हें कसकर दबोचा था।फिर मैंने भाभी को दीवार से सटा दिया और उनके होंठ, गर्दन पर, मेरे होंठो से चूमने लगा था। अब मेरे हाथ उनके गाउन में अंदर जाकर उनके बूब्स दबा रहे थे। अब वो भी गर्म हो चुकी थी। फिर उन्होंने कहा कि अरुण अभी नहीं दरवाजा खुला है, अभी कामवाली आएगी, हम अभी ये सब नहीं कर सकते है। तो फिर मैंने उन्हें छोड़ दिया। फिर मैंने अपने आपको संभाला और उन्होंने अपने कपड़े ठीक किए और फिर में पानी लेकर ऑफिस चला गया। फिर दोपहर में बॉस ने कहा कि अरुण मुझे कुछ काम से गोधरा जाना है, तुम 1 बजे बाद के दोनों बैच कैंसिल करके क्लास बंद करके चले जाना। तो मैंने कहा कि ओके और फिर वो चले गये। फिर 1 घंटे के बाद ऑफिस के फोन की रिंग बजी तो मैंने फोन रिसीव किया। अब सामने भाभी थी।…फिर उन्होंने कहा कि अरुण तुम्हारे साहब गोधरा गये है, क्लास की चाबी तुम अपने साथ ले जाओगे या देकर जाओगे? तो तब मैंने कहा कि जैसा आप कहे। फिर तब उन्होंने कहा कि ठीक है में फोन रखती हूँ और तुम वहीं रहना और फिर थोड़ी देर के बाद मैंने देखा कि भाभी खुद ऑफिस में आई। अब वो साड़ी पहने हुए थी। फिर उन्होंने मुझसे पूछा कि 2 बैच कैंसिल करनी थी, तुमने सबको बता दिया? तो मैंने कहा कि हाँ सब चले गये है। फिर तब भाभी ने कहा कि ठीक है, अरुण में यहाँ क्यों आई तुमने पूछा नहीं? तो तब मैंने कहा कि आप मेरे बॉस की बीवी हो, आप जब भी चाहे आ सकती है, में पूछने वाला कौन होता हूँ? तो तब उन्होंने कहा कि हाँ ये भी सही है, में तुम्हारे बॉस की बीवी हूँ, लेकिन अब में तुम्हारी बीवी बनने यहाँ आई हूँ, सुबह की अधूरी बात पूरी करने आई हूँ अरुण। फिर मैंने तुरंत उनकी तरफ देखा और उनके पास गया और उन्हें सीधा पकड़कर टेबल पर बैठा दिया और उनके होंठो को चूमने लगा था। अब वो भी मेरा साथ दे रही थी। फिर मैंने उनका पल्लू नीचे गिरा दिया। ये कहानी आप डॉट कॉम पर पड़ रहे है।अब उन्होंने मेरा लंड मेरी पेंट के ऊपर से ही पकड़ लिया था और उसे सहलाने लगी थी और बोली कि अरुण आज में माँ बनाना चाहती हूँ, क्या तुम मुझे बच्चा दे सकते हो? तो तब मैंने कहा कि भाभी बॉस को पता ना चल जाए? अब में नीचे बैठ गया था और उनकी नाभि को चाटने लगा था, उनकी नाभि बहुत ही सेक्सी थी। फिर मैंने कहा कि भाभी आप बहुत ही सेक्सी हो। तो तब उन्होंने कहा कि अरुण अब में तुम्हारी बीवी बन गयी हूँ, अब मुझे भाभी मत कहो निर्मला कहो। तब मैंने कहा कि हाँ आज से तुम मेरी हो नीरू। अब मैंने उसे वही नीचे जमीन पर ही लेटा दिया था और उसके ब्लाउज के हुक खोलने लगा था और उससे बोला कि नीरू आज में तुम्हें पूरी नंगी करूँगा और जी भरकर चोदूंगा। तो तब उसने कहा कि हाँ जान जितना चाहो चोदो मुझे, आज मुझे नंगा करके चोदो। अब मैंने उसके सारे कपड़े निकाल दिए थे और अपने भी पूरे कपड़े निकाल दिए थे। अब हम दोनों ऑफिस में पूरे नंगे थे।फिर मैंने अपना मुँह उसके दोनों पैरो के बीच में उसकी चूत पर लगा दिया था। अब मेरे दोनों हाथ उसके बूब्स दबा रहे थे और मेरी जीभ उसकी चूत चाट रही थी। अब नीरू के मुँह से आहह, आआअ, एयए, आह जैसी आवाजे निकल रही थी। अब वो बहुत गर्म हो रही थी। अब वो मेरा सिर उसकी चूत में ज़ोर- जोर से दबा रही थी और बोली कि अरुण आज तक किसी ने मेरी चूत नहीं चाटी, आज तुमने मुझे ये सुख दिया है, आह अरुण। अब उसकी चूत में से पानी निकल रहा था। फिर मैंने मेरी दो उंगलियाँ उसकी चूत में डाल दी और अंदर बाहर करने लगा था। अब वो सिसकियाँ ले रही थी, ये क्या आग लगा दी तुमने? अब बुझा भी दो इस आग को, प्लीज। फिर मैंने कहा कि रानी अभी तो आग लगी है, अभी से बुझा दी तो क्या मज़ा आएगा? लो मेरे लंड को तैयार कर दो तो ये आग बुझा देगा और फिर मैंने अपना लंड उसके मुँह में दे दिया।अब वो मेरे लंड को पागलों की तरह चूसने लगी थी और मेरे लंड को अपने एक हाथ से मसल रही थी और अपने मुँह से जोर-जोर से चूस रही थी। फिर मैंने उसे जमीन पर लेटा दिया और अपना लंड उसकी चूत के दरवाजे पर रख दिया और ज़ोर से एक धक्का दिया तो मेरा पूरा 6 इंच का लंड उसकी चूत की दीवार को फाड़ते हुए अंदर घुस गया। फिर तभी उसके मुँह से आअहह की आवाज निकल गयी और बोली कि आह्ह्ह अरुण में मर गयी, तुम्हारा लंड दर्द का मज़ा दे रहा है, मुझे पेलो, पेलो ज़ोर से, पेलो अरुण। अब मैंने भी जोर-जोर से धक्के देना शुरू कर दिया था, उसकी आँखें बंद थी। अब में उसके बूब्स को ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था और जोर-जोर से धक्के दिए जा रहा था। फिर तभी थोड़ी देर के बाद मैंने अपने लंड पर गर्म पानी महसूस किया। अब निर्मला झड़ गयी थी, उसके चेहरे पर संतोष दिख रहा था, लेकिन मेरा अभी भी बाकी था। अब में धक्के मार रहा था। अब वो धीरे-धीरे फिर से गर्म हो रही थी। अब में अपना एक हाथ उसके पैर पर घुमा रहा था।अब उसके मुँह से अया, आआहह, आअहह, आहह की आवाजे निकल रही थी और फिर थोड़ी देर के बाद वो फिर से झड़ गयी और में 30 मिनट तक उसको चोदता रहा। अब वो 30 मिनट में 4 बार झड़ गयी थी। फिर मैंने अपना पूरा पानी उसकी चूत में ही छोड़ दिया और उसकी चूत मेरे वीर्य से भर गयी थी। अब में अपना लंड बाहर निकाल रहा था। फिर उसने मना कर दिया और बोली कि अरुण थोड़ी देर ऐसे ही रहने दो, उसका मन करेगा तब ये खुद ही निकल जाएगा। फिर मैंने अपना लंड ऐसे ही उसकी चूत में छोड़ दिया और अब में उसके ऊपर ही लेट गया था। अब वो मेरे सिर में अपनी उंगलियाँ घुमा रही थी और में उसके बूब्स को चूस रहा था। अब मेरा लंड ठंडा होकर अपने आप उसकी चूत से बाहर हो गया था। फिर थोड़ी देर के बाद में उसके ऊपर से उठा और खड़ा हुआ तो उसने मेरा लंड पकड़ लिया और अपने मुँह में डाल दिया और लॉलीपोप की तरह चूसने लगी थी।अब मेरा लंड थोड़ी देर में वापस तैयार हो गया था तो मैंने उसे टेबल के कोने पर बैठा दिया और मेरा लंड फिर से उसकी चूत में डाल दिया और ज़ोर-ज़ोर से धक्के देने लगा था। फिर मैंने 30 मिनट तक फिर से निर्मला को चोदा। अब इस बार वो 4 बार झड़ गयी थी। फिर मैंने जैसे ही अपना लंड बाहर निकाला, तो उसने खड़ी होकर अपने कपड़े उठाए। तो मैंने उसके हाथ से कपड़े छीन लिए और कहा कि रानी अभी मेरा जी नहीं भरा और फिर मैंने उसे टेबल पर बैठाकर उसके दोनों पैर ऊपर कर दिए और मेरा लंड उसकी गांड के छेद पर रख दिया। तो वो बोली कि नहीं अरुण, अपना लंड वहां मत पेलो वरना ये फट जाएगी। फिर तब मैंने कहा कि आज तो इसे भी फाड़ देना है, इसने मुझे बहुत तड़पाया है, तुम ये रोज लटक मटककर दिखाती थी मुझे और फिर मैंने ज़ोर से एक धक्का दिया तो मेरा आधा लंड उसकी गांड में घुस गया और वो चिल्ला उठी अरुण आह में मर गयी, हाईईईईईईईईईई। फिर तभी मैंने फिर से एक धक्का दिया तो मेरा पूरा लंड अंदर चला गया।अब में मेरा लंड अंदर बाहर करने लगा था। अब वो भी मेरा कंधा पकड़कर सस्स्स्स्सह करते हुए उछल- उछलकर गांड मरवा रही थी। फिर 15 मिनट तक उसकी गांड मारने के बाद मैंने अपना पूरा वीर्य उसकी गांड में ही डाल दिया। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला। फिर निर्मला ने अपने कपड़े पहने और मैंने भी अपने कपड़े पहन लिए। फिर मैंने उससे पूछा कि अब कब मिलेगा मौका मेरी रानी? तब वो बोली कि कल सुबह तो तुम आओगे ना घर तब, में राह देखूँगी और फिर उसने मेरे होंठो को चूम लिया। अब उस दिन मेरा मन निर्मला को छोड़ने का नहीं कर रहा था ।।धन्यवाद ……