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भाई की साली ने मजा दिया

… : महेश … , मेरा नाम महेश है और में राजस्थान का रहने वाला हूँ। आज में आपको जो story बताने जा रहा हूँ, वो बिल्कुल सच्ची है, इसमें कुछ भी झूठ नहीं है सिर्फ़ नाम का फ़र्क़ हो सकता है। मेरी उम्र उस समय 21 साल थी और हमारे घर पर मेरे भाई की साली आई थी। हमारा सामूहिक परिवार है, हम घर में करीब 14 मेंबर एक साथ रहते है। में अपने भाइयों में सबसे छोटा हूँ। में उस समय फाइनल ईयर में पढ़ रहा था। मैंने कॉलेज में दोस्तो के साथ रहकर सेक्स के बारे में काफ़ी सुना था, लेकिन कभी मौका नहीं मिला था। में अक्सर रास्ते में आती जाती लड़कियों को देखता और ठंडी आहें भरता था। मेरे भाई की साली का नाम सुनीता है, वो अपनी बहन के पास घूमने आई थी, वो बहुत स्मार्ट है। हम सब घरवाले एक साथ बैठकर खूब बातें करते थे। मेरे भाई के पास बिल्कुल समय नहीं था कि वो अपनी साली को घुमा सके।फिर भाई ने मुझसे कहा कि इसे आस पास के मंदिर और गार्डन घुमा लाओ। फिर में अपनी भतीजी जो कि 9 साल की थी उसे और सुनीता को लेकर घूमने निकल गया। फिर हम सारा दिन घूमते रहे। अब दोपहर को हम गार्डन में बैठे थे कि अचानक गार्डन में एक कोने में एक कपल बैठकर एक दूसरे को किस कर रहा था। फिर मेरी नजरें उधर गयी और में छुप-छुपकर वो नज़ारा देखने लगा तो तभी अचानक से मैंने देखा कि सुनीता की नजरे भी वही है। अब हम दोनों वही सीन देख रहे थे, लेकिन शो ऐसे कर रहे थे कि हमने कुछ भी नहीं देखा है। अब मेरी भतीजी खेल रही थी, तो तभी अचानक से उस लड़के ने अपना एक हाथ अपनी साथ वाली लड़की की शर्ट में डाल दिया। फिर मैंने उधर देखा और फिर मुड़कर सुनीता को देखा तो सुनीता भी वही देख रही थी। फिर उसने मुझे देखा कि में सुनीता को देख रहा हूँ, तो सुनीता सकपका गयी। मुझे हँसी आ गयी, तो वो भी हँसने लगी और फिर हम बिना कुछ कहे वहाँ से उठ गये और दूसरी तरफ चले गये।अब में सुनीता के बहुत नजदीक चलने लगा था। अब सुनीता भी मेरे पास सटकर चलने लगी थी। अब मेरा गला सूखने लगा था। फिर उसके बाद वहाँ हमने सॉफ्टी खाई और गार्डन से चले गये। अब शाम को हम सब एक रूम में बैठकर टी.वी देख रहे थे, मैंने रज़ाई ओढ़ रखी थी। फिर सुनीता कमरे में आकर मेरे पास में बैठ गयी। अब उसे भी सर्दी लग रही थी, तो थोड़ी सी रज़ाई में उसने अपने पैर डाल दिए। अब में उसके पैरो को सहलाने लगा था तो तब उसने कुछ नहीं कहा। अब सब टी.वी देखने में मस्त थे। फिर में अपना एक हाथ उसकी जांघो तक ले गया। अब मुझे बहुत डर लग रहा था, लेकिन मज़ा भी आ रहा था।फिर वो बहुत देर तक बैठी रही और में अपनी हरकते करता गया। फिर उसकी बहन उसको बुलाकर ले गयी। फिर रात को रूम में डबल बेड पर सुनीता और मेरी भतीजी सो गये और वहाँ एक छोटा पलंग और था जहाँ पर में सो गया था और मेरी आंटी बाहर वाले कमरे में सो गयी थी। अब मुझे नींद ही नहीं आ रही थी। फिर रात को करीब 1 बजे में धीरे से अपने बिस्तर पर से उठा और सुनीता के बेड के पास नीचे जमीन पर बैठ गया। फिर मैंने अपना एक हाथ उसके हाथ पर रखा तो वो सो रही थी। फिर मैंने धीरे से अपना एक हाथ उसके गालों पर रखा और सहलाने लगा। अब मुझे डर भी बहुत लग रहा था। फिर सुनीता नहीं उठी तो मैंने अपना एक हाथ बिस्तर के अंदर कर लिया। अब मुझे सर्दी भी बहुत लग रही थी, लेकिन मज़ा भी बहुत आ रहा था। फिर मैंने अपना एक हाथ धीरे से उसके बूब्स पर रखा और इंतज़ार करने लगा कि उसका क्या जवाब होता है? फिर में धीरे-धीरे से उसके बूब्स को दबाने लगा, तो उसका कोई जवाब ना देखकर मेरी हिम्मत बढ़ गयी और में उसके बूब्स को थोड़ा और ज़ोर से दबाने लगा था, उसके बूब्स की साईज 32 थी। अब मुझको बहुत मज़ा आ रहा था।फिर मुझे लगा कि सुनीता जाग रही है, लेकिन नाटक सोने का कर रही है। फिर मैंने अपने हाथ से उसकी कमीज के बटन खोल दिए और उसकी ब्रा पर अपना एक हाथ रख दिया। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने उसकी ब्रा ऊपर कर दी। अब उसके बूब्स नंगे हो गये थे, तो में उन्हें दबाने लगा। फिर मैंने उनको चूसना शुरू कर दिया और सुनीता अब भी बिल्कुल चुपचाप लेटी थी। फिर में रज़ाई में घुस गया और बच्चे की तरह उसके निपल्स को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा था। अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर में अपना एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी टाँगो पर फैरने लगा, उसने नाईट सूट पहना था और ऊपर बटन वाला और इलास्टिक वाला लोवर था। फिर मैंने अपना एक हाथ उसके लोवर में डाल दिया और उसकी पेंटी के अंदर ले गया, वहाँ बहुत गर्मी थी। अब मेरा हाथ गर्म हो गया था। फिर में उसकी चूत पर अपना एक हाथ फैरने लगा और वो तब भी सोने का नाटक करती रही।…फिर में उसके होंठो को चूमने लगा। अब वो भी मेरे होंठ चूम रही थी, लेकिन आँखे नहीं खोल रही थी। अब मुझे डर भी बहुत लग रहा था। फिर अचानक से कोई आवाज सुनकर में एकदम से खड़ा हो गया और जल्दी से बाहर निकल गया, ताकि अगर कोई हो तो में कहूँ कि पानी पीने निकला था। अब मेरी आंटी अपने बेड पर नहीं थी। फिर में पानी पीने किचन में गया, तो मेरी आंटी पानी पी रही थी। फिर आंटी ने कहा कि आज बहुत ज़्यादा सर्दी है। तो तब मैंने कहा कि हाँ और फिर में पानी पीकर कमरे में आया। तो तब आंटी भी आ गयी और डबल बेड पर सुनीता के पास ये कहकर सो गयी कि पास वाले रूम में ज़्यादा सर्दी है। फिर में गॉड को थैंक्स कहने लगा कि अच्छा हुआ की आंटी ने नहीं देखा वरना हंगामा हो जाता। फिर में टॉयलेट जाकर अपने हाथ से अपने लंड से पानी निकाल आया। फिर कुछ दिन तक ऐसे ही चला। अब मुझे जब भी कोई मौका मिलता तो में उसके शरीर को टच करता था। ये कहानी आप डॉट कॉम पर पड़ रहे है।अब मुझे एक रात नींद नहीं आ रही थी, तो तब रात के करीब 2 बजे सुनीता को रूम से बाहर जाते देखा तो में भी चुपचाप उसके पीछे रूम से बाहर निकल गया। अब वो टॉयलेट करने गयी थी, टॉयलेट का दरवाजा अंदर से बंद था और में बाहर ही खड़ा था। फिर कुछ देर के बाद उसने दरवाजा खोला और जैसे ही दरवाजे से बाहर निकलने लगी तो मैंने उसका रास्ता रोक लिया। फिर वो कुछ नहीं बोली और में उसे पुश करता हुआ टॉयलेट में ले गया और टॉयलेट का दरवाजा अंदर से बंद करके उसे पागलों की तरह चूमने लगा था। वो कुछ नहीं बोली और सिर्फ़ किस करने लगी थी। फिर मैंने उसके होंठो को चूमा और चाटा, गालों को चूमा और अपना एक हाथ उसके शरीर पर फैरने लगा था। अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर मैंने उसकी कमीज के बटन खोल दिए और उसकी कमीज उतार दी। अब उसकी ब्रा में क़ैद उसके बूब्स मुझसे कहने लगे थे कि जल्दी से हमें आज़ाद करो मेरी जान।फिर मैंने उसकी ब्रा भी हटा दी और जल्दी से अपनी टी-शर्ट उतार दी। अब में उसके बूब्स से खेलने लगा था और उसके निपल्स को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा था। अब सुनीता मेरे बालों को सहला रही थी। अब हम कुछ भी नहीं कर रहे थे। फिर मैंने उसका लोवर नीचे कर लिया और नीचे बैठकर उसकी टाँगो और जांघो पर किस करने लगा था। अब मेरे हाथ बहुत तेज़ी से चल रहे थे, मुझे लगा कि थाली भरकर 36 भोग सामने है और इसे साफ़ करना है। फिर मैंने खड़े होकर अपनी पैंट उतार दी। अब हम दोनों सिर्फ़ चड्डी में थे। फिर मैंने उसे ऊपर से लेकर नीचे तक खूब चूमा, चाटा, अब मेरा लंड बिल्कुल तैयार था। फिर मैंने उसकी पेंटी उतार दी, यह मेरा पहला अनुभव था मैंने सेक्स के बारे में सिर्फ़ फ़िल्मो से सीखा था और यह सुनीता का भी पहला अनुभव था।फिर में उसकी चूत पर अपना एक हाथ फैरने लगा और लंड कहाँ जाता है, वो जगह अपनी उंगली से तलाश कर रहा था। अब मुझे वो जगह मिल गयी थी। फिर मेरी उंगली जैसे ही सुनीता की चूत में गयी, तो वो सिसकियाँ लेने लगी। अब उसे बहुत मज़ा आ रहा था, उसकी चूत गीली हो गयी थी। अब वो मुझको ज़ोर से खुद से चिपकाने लगी थी। फिर मुझे लगा कि अब हमें देर नहीं करनी चाहिए तो में अपनी चड्डी उतारकर अपना लंड उसकी चूत में डालने की नाकामयाब कोशिश करने लगा, क्योंकि वो हाईट में मुझसे छोटी थी और में टांगो को नीचे करके भी कोशिश कर रहा था, लेकिन में नहीं कर पा रहा था। फिर मैंने टॉयलेट के फर्श पर उसे लेटा दिया। अब उसने अपनी आँखे बंद कर दी थी। फिर में उसके ऊपर आया और उसकी दोनों टांगे ऊपर करके अपना लंड उसकी चूत में डालने लगा, लेकिन मेरा लंड सही निशाने पर नहीं लग रहा था। फिर मैंने अपनी उंगली को उसकी चूत में डालकर सही जगह देखी और अपना लंड उस जगह पर सेट करके थोड़ा सा पुश किया तो मेरा लंड अभी थोड़ा सा ही अंदर गया था कि वो झटपटाने लगी और मुझसे बोली कि बाहर निकालो इसे, मुझे बहुत दर्द हो रहा है। तो में वहीं रुक गया।फिर थोड़ी देर के बाद मैंने फिर से पुश किया, तो वो धीरे से चिल्लाई उईईईईईई माँ, आआअ ये तो बहुत दर्द कर रहा है। अब में उसके बूब्स को दबाने लगा था और उसके गालों को चूमने लगा था। फिर मैंने अपना लंड थोड़ा सा बाहर करके एकदम से ज़ोर लगाया। तब वो बोली कि नन्नू प्लीज इसे बाहर निकालो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है। अब में ऐसे ही लेटे-लेटे उसे प्यार करने लगा था। अब उसकी आँखों में से आँसू आने लगे थे। फिर मैंने थोड़ा सा अपना लंड बाहर निकाला और धीरे-धीरे अंदर करने लगा था। अब वो तड़प रही थी। फिर मैंने अपने लंड को और ज़्यादा अंदर कर लिया और उसके जवाब का इन्तजार करने लगा। फिर मुझे लगा कि अब वो पहले से अच्छा महसूस कर रही है। फिर में अपनी कमर को जल्दी-जल्दी अंदर बाहर करने लगा, उसकी चूत बहुत टाईट थी।अब मुझको बहुत मज़ा आ रहा था। अब उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था। अब वो मेरा पूरा साथ दे रही थी, अब वो अपनी कमर हिलाने लगी थी। फिर थोड़ी देर के बाद में खाली हो गया और उसके ऊपर से उठा तो तब मैंने देखा कि उसकी चूत में से खून निकल रहा है। फिर मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने और वो भी रोते हुए अपने कपड़े पहनने लगी थी। अब वो मुझसे कहती जा रही थी कि नन्नू तुमने ये ठीक नहीं किया, अब किसी को मालूम हो जाएगा तो में क्या मुँह दिखाऊँगी? फिर मैंने उसे समझाया कि चुप हो जाओ, ऐसा मुँह देखकर तो कोई भी समझ जाएगा। फिर वो 3-4 दिन तक हमारे यहाँ और रही, लेकिन उसने फिर मुझसे बात नहीं की, शायद उसका मतलब निकल गया था इसलिए। अब तो सुनीता की शादी भी हो गयी है, उसकी शादी के बाद मैंने कभी उसे नहीं देखा। मैंने पहली बार देखा कि यहाँ सब अपने अनुभव शेयर करते है, में नहीं जानता कि यहाँ कौन कितना सच लिखता है? लेकिन मेरी यह story मेरी अपनी और बिल्कुल सच्ची है। फिर मैंने उसके बाद कभी गैर लड़की से कोई संबंध नहीं बनाया, मुझे लाईफ के यह पल शेयर करने में बहुत अच्छा लगा और मुझे तो पूरी जिंदगी यह सब याद रहेगा, ये मेरी यादों से जुड़ा है ।।धन्यवाद ……