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मैडम के साथ फ़ोन सेक्स-32

उसके होंठों की मिठास को महसूस करते हुए मेरे लंड ने भी जवाब दे दिया और जल्दी ही मेरे लंड की पिचकारियाँ स्नेहा के मुंह के अन्दर जाने लगी….

अपने मुंह में मेरे रस को पाकर वो जल्दी से अपनी चूत को अंकित के हाथों पर और तेजी से रगड़ने लगी और मेरे लंड की आखिरी बूँद चूसते हुए उसकी चूत ने भी अपना प्यार बाहर की और फेंकना शुरू कर दिया…जिसे अंकित ने हाथों में समेत कर चाटना शुरू कर दिया….

स्नेहा तो निढाल सी होकर वहीँ पसर गयी…

अंकित भी अपने कपडे ठीक करता हुआ उठ खड़ा हुआ…

हिनल अभी भी ऊपर और नीचे से नंगी सी होअर मुझसे चिपकी खड़ी थी….

स्नेहा और अंकित हेरानी भरी नजरों से मुझे और हिनल को देख रहे थे…मानो कह रहे हो, भाई अब तो छोड़ दो एक दुसरे को…

सच में…ऐसा बर्थडे किसी-किसी को ही नसीब होता है..

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अब आगे
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मैं : हैप्पी बर्थडे हिनल..
हिनल खुश होते हुए : थैंक्स..एंड ये सब …इसके लिए भी..

और फिर उसने स्नेहा के सामने ही मेरे लंड को पकड़ा और उसे निचोड़ सा दिया…मेरे मुंह से आह सी निकल गयी.

पर आश्चर्य की बात ये थी की स्नेहा ने कुछ नहीं कहा..शायद इस वजह से की उसने भी तो अपने पुराने यार अंकित से मजे लिए थे अभी मेरे सामने..

अब काफी देर हो चुकी थी, बर्थडे गर्ल हमारे साथ थी, शायद उसे लोग ढूंढ भी रहे होंगे..

हिनल : स्नेहा, तू बाहर निकल और जाकर देखा जरा मम्मी कहीं मुझे न ढूंढ रही हो..अगर मेरे बारे में पूछे तो कहना की मैं तेरे साथ ही थी, बाथरूम गयी थी..

हिनल की बात सुनकर वो बाहर निकल गयी..
हिनल अंकित को देखते हुए : अब तुम भी जाओ..एक साथ सबका बाहर निकलना ठीक नहीं है.

और अंकित भी निकल गया.

अंकित के बाहर जाते ही हिनल ने मेरी तरफ मुंह किया और मुझसे बुरी तरह से लिपट गयी…मुझे लगा की उसने जान बुझकर दोनों को पहले भेज दिया है और अब ये मेरा “बलात्कार” करेगी..पर वो चाहकर भी कुछ और नहीं कर सकती थी, क्योंकि उसकी ही पार्टी थी इसलिए उसका जल्दी बाहर निकलना जरुरी था..

हिनल : तुम्हारा ये बर्थडे गिफ्ट मुझे हमेशा याद रहेगा..स्नेहा बड़ी लक्की है, जिसे तुम जैसा बी ऍफ़ मिला..
और ये कहते हुए उसने मेरे होंठो पर एक और गीली वाली पप्पी कर दी और मेरे लंड को भी पकड़कर मसल दिया.

मैं : तुम अपनी बेस्ट फ्रेंड के बॉय फ्रेंड के साथ जो कर रही हो…स्नेहा क्या सोचेगी..
हिनल हँसते हुए : हा हा…स्नेहा…अरे उसके और मेरे बीच कोई फर्क नहीं है…पता है, पहली बार स्नेहा को मैंने अपने फ्रेंड का पेनिस सक करने को दिया था…मैंने और स्नेहा ने एक साथ काफी मजे लिए हैं…वो कुछ नहीं कहेगी..

मैं : पर इसका मतलब ये नहीं की मैं भी कुछ नहीं कहूँगा…
हिनल कामुक अंदाज में, अपनी जीभ से मेरे होंठो को चाटते हुए : अच्छा जी…तुम मुझे ना कह सकते हो क्या…

अब मैं क्या करूँ, अगर कोई लड़की इस तरह से पेश आये तो अपने पर तो काबू पाना मुश्किल है,पर लंड महाराज को कोन समझाए..सो उसके खड़े होते ही मेरी बात का वजन अपने आप हल्का हो गया और वो मुस्कुराने लगी…

हिनल : जल्दी ही मिलेंगे…दोबारा…जब टाईम ही टाईम होगा..

और ये कहकर वो मुझे अँधेरे में खड़े लंड के साथ अकेला छोड़कर बाहर निकल गयी…

मैं कभी उसकी मटकती हुई गांड को और कभी अपने फुफकारते हुए लंड को देख रहा था.

मैं भी अपने कपडे ठीक करके बाहर निकल गया.
मैंने बाहर जाकर देखा की अंकित अपने के साथ कोने में जाकर बैठा हुआ है और खाना खा रहा है.
और हिनल अपने मम्मी पापा के साथ खड़ी हुई है..मुझे स्नेहा कही दिखाई नहीं दी.

मैं हिनल के पास गया : एक्स्कुस मी हिनल…वो, स्नेहा कहा है..
हिनल : अरे विशाल…आओ..मोम डेड..ये विशाल है, इसके बारे में ही बता रही थी मैं अभी.
हिनल की मम्मी : अच्छा…तो तुम भी इनके ग्रुप में ही हो..और बेटा..कहाँ रहते हो..कोन-२ है तुम्हारे घर पर…
वगेरह-२
मैं हैरान था की हिनल ने क्या बोला है अपने मम्मी पापा को और वो ऐसे क्यों ये सब मुझसे पूछ रहे हैं…शादी करनी है क्या इसकी मेरे साथ…

खेर मैंने. उनकी बातों का जवाब दिया और फिर मैं अलग होकर खड़ा हो गया और स्नेहा का इन्तजार करने लगा..

हिनल अपने मम्मी पापा से अलग होकर मेरे पास आई.
हिनल : क्यों घबरा रहे थे तुम…
वो शायद अपने मम्मी पापा के सामने मेरी पतली हालत को देखकर बोल रही थी.
मैं : वो तुमने क्या कहा अपने मम्मी पापा को मेरे बारे में जो वो इतना कुछ पूछ रहे थे..
हिनल : दरअसल मेरी मम्मी, पापा के साथ दो महीने के लिए दुबई जा रही है, अगले महीने..और स्नेहा को तो वो जानते ही हैं..सो मुझसे पूछ रहे थे की स्नेहा के साथ ये कोन लड़का आया है, मैंने कह दिया की हमारे ग्रुप में ही है, और स्नेहा का अच्छा दोस्त है, स्नेहा अक्सर मेरे साथ मेरे घर पर भी रहती है..और मम्मी पापा के जाने के बाद भी वो कभी मेरे घर या फिर मैं उसके घर जाकर रहूंगी..और तुम तो जानते ही हो की जवान लड़की के मम्मी पापा कितने फिकरमंद होते हैं, तभी वो तुम्हारे बारे में पूछ रहे थे..की कहीं उनके जाने के बाद तुम भी किसी दिन हमारे घर न आ जाओ, स्नेहा के साथ…समझे..

मैं : समझा..पर तुम फिकर मत करो…नहीं आऊंगा..मैं .

हिनल मेरे और पास आते हुए : उन्हें एक बार जाने तो दो तुम…फिर मैं देखती हूँ की तुम अपने घर से जाते कैसे हो ..समझ गए न..
मैं उसकी प्लानिंग सुनकर ही सुन्न सा हो गया..मेरे जहाँ में वाईल्ड इमेजेस आने लगी, जिसमे मैं , स्नेहा और हिनल, नंगे एक ही बिस्तर में, चुदाई करने में लगे हुए हैं…और भाग भागकर एक दुसरे को पकड़ रहे हैं…हिनल के मोटे मुम्मे भागने की वजह से हवा में उचल रहे हैं…और और…

हिनल : ऐ मिस्टर…कहाँ खो गए…अगले महीने की प्लानिंग बनानी शुरू कर दी है क्या…हे हे..

तभी स्नेहा आ गयी : किस बात की प्लानिंग बन रही है भाई..हमें भी तो बताओ..

हिनल कड़ी हुई मुस्कुराती रही और मेरा लाल चेहरा देखकर स्नेहा बोली : हे हिनल…देख तू मेरे विशाल को ज्यादा तंग मत कर…तुझे अब अंकित मिल गया है न..तू उसके साथ मजे कर…जा, वो तुझे ही देख रहा है…

हम सबने देखा, अंकित हमें ही बैठा हुआ देख रहा था..

हिनल ने हंस कर उसकी तरफ इशारा किया..और उसे थोडा वेट करने का इशारा किया,

हिनल :यार, तू कबसे इतनी पोसेसिव हो गयी, खेर, मैं विशाल से कह रही थी की अगले महीने मम्मी और पापा दुबई जा रहे हैं..और उसकी ही प्लानिंग करने की बात कह रही थी मैं..

स्नेहा : वाव…तब तो मजा आ जाएगा, तू अंकित को बुला लेना और मैं विशाल के साथ आ जाउंगी…पूरी ऐश करेंगे…वैसे कितने दिन के लिए जा रही है आंटी..

हिनल : पुरे दस दिनों के लिए.

स्नेहा : वाव…मजा आएगा…है न विशाल..

मैंने भी हंस कर उसकी ख़ुशी में इजहार किया…मैं तो पहले से ही आने वाले दिनों की तस्वीर अपने दिमाग में बना चूका था.

उसके बाद स्नेहा और मैंने खाना खाया और वापिस चल दिए.
किटी मेम का दो बार फोन आ चूका था..पर स्नेहा ने बताया नहीं की मैं भी उसके साथ हूँ.

स्नेहा को मैंने घर छोड़ा..वो पुरे रास्ते मुझसे चिपक कर बैठी रही..

स्नेहा का घर आने वाला था तो वो बोली : विशाल, वो मेरी बिल्डिंग से पहले वो पेड़ है न..उसके पीछे रोक लेना.

मैं वैसा ही किया.

वो मेरी बाईक के पीछे से उतरी..और आगे आकर वो उचक कर मेरी तरफ मुंह करके, बाईक के पेट्रोल टेंक के ऊपर बैठ गयी, दोनों तरफ पैर करके..

और अगले ही पल मैं और स्नेहा एक दुसरे को बुरी तरह से चूमने और चूसने में लगे हुए थे..मेरा खड़ा हुआ लंड सीधा उसकी चूत पर ठोकर मार रहा था..

स्नेहा : ओह्ह्ह्ह..विशाल…..आज तो तुम मेरी जान लेकर रहोगे…कितना सताते हो तुम…पूच पूच…

उसने तो मेरे चेहरे पर अपने होंठो के निशान छोड़ने शुरू कर दिए..

तभी स्नेहा का फोन बज उठा , उसने झल्लाते हुए फोन उठाया : या मोम…क्या है…आ गयी बस…बोला न…नीचे ही हूँ मैं…आ रही हूँ ऊपर…ओके..बाय…

उसके चेहरे पर गुस्सा साफ़ दिखाई दे रहा था..

मैं : स्नेहा , कोई बात नहीं , तुम जाओ…ये सब तो होता ही रहेगा अब..

स्नेहा : यस …ठीक है…गुड नाईट…स्वीट ड्रीम…और वो हिनल से ज्यादा मेल जोल बढाने की जरुरत नहीं है…समझे न…चल बाय…घर जाकर फोन करना.

और वो मुझे एक और बार चूम कर अपने घर की तरफ निकल गयी.

मैंने भी बाईक जल्दी से चलायी और अपने घर पहुँच गया.

मम्मी : आजकल बड़ी पार्टियाँ शार्तियाँ हो रही है…

मैं : मोम…आपका बेटा जवान हो गया है…ये सब तो चलता ही रहेगा अब…

मम्मी : ठहर बदमाश…अभी बताती हूँ तुझे…

पर उनके पकड़ने से पहले ही मैं अपने कमरे में घुस गया और दरवाजा बंद कर लिया.

मैंने शायद थोडा ज्यादा खा लिया था..मैं सीधा टॉयलेट में गया…और पेंट उतार कर कमोड पर बैठ गया.

मेरा फोन बजने लगा.
मैंने फ़ोन उठाया, वो अंशिका का था..

अंशिका :ये क्या हो रहा है आजकल…तुम्हे फोन करने की भी फुर्सत नहीं है…तुम्हारा फोन अनरीचएबल आ रहा था..पता है, एक घंटे से ट्राई कर रही हूँ…
मैं : सॉरी बाबा…वो इसमें आजकल सिग्नल की प्रोब्लम है..
अंशिका : ठीक है, ठीक है…वैसे क्या कर रहे हो अभी.

मैं उसे क्या बोलता…

मैं : कुछ नहीं…बस नहाने की सोच रहा था…गर्मी लग रही थी…बाथरूम में आया ही था बस.
अंशिका :ओहो…मैं भी आ जाऊ क्या..
मैं : नेकी और पूछ पूछ…आ जाओ तुम..
अंशिका : पर मुझे तुमपर भरोसा नहीं है, तुम नहाओगे नहीं , कुछ और करने लग जाओगे.
मैं : तो तुम नहीं चाहती की मैं कुछ और करूँ.

वो कुछ न बोली

मैं : बोलो न…चुप क्यों हो गयी तुम…

अंशिका : मैं क्या बोलू…तुम नहीं जानते विशाल, मेरी क्या हालत है आजकल..रात दिन बस तुम्हारे बारे में ही सोचती रहती हूँ..और तुम्हारे साथ कैसे क्या करुँगी, बस यही सब चलता रहता है मेरे दिमाग में…तुम जल्दी कुछ करो विशाल..नहीं तो मैं मर जाउंगी…

मैं : तुम मेरे लंड को लिए बिना नहीं मर सकती…समझी न..

अंशिका हँसते हुए : मैं तो तुम्हारा लंड लेते हुए ही मरना चाहती हूँ..

मैं : इतना भी लम्बा नहीं है मेरा लंड…सिर्फ सात इंच का है, और इसे लेने से तुम मरोगी नहीं, बल्कि मजे ले लेकर जिन्दा रहोगी..समझी न.

अंशिका : तो कब मुझे जिन्दा कर रहे हो तुम, क्योंकि तुम्हारा लिए बिना तो मेरा शरीर मरे के समान है…

उसकी बात मेरे दिल को छु गयी.

मैं : तुम फिकर मत करो..जल्दी ही मैं कुछ करता हूँ..

उसके बाद कुछ और बाते करने के बाद उसने फोन रख दिया.

अब मेरे सामने अपनी जिन्दगी का सबसे बड़ा चेलेंज था…अंशिका की चुदाई करना..और वो भी जल्दी ही…क्योंकि उसकी वजह से कितनी और चुते भी मेरे लंड का इन्तजार कर रही थी..