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सुहागरात के बाद

सुहागरात के बाद …..
सुबह सुबह आँख खुलते ही …….
आगे की कहानी…….

फिर इन्होने मुझे अपनी बाहो में लिया और जैसे गोदी में भर लिया और उठा के बाथरूम की तरफ चल दिए
हम दोनों पहले से ही एक दूसरे को जानते थे और प्रेम प्रसंग की बातें तो हम हमेशा ही करते थे बस कमी थी तो इस सुनहरे मिलन की जिसकी प्यास दोनों को ही बराबर थी 
वो भी ये अच्छी तरह जानते थे की मैं कितनी प्यासी हूँ इसलिए हम लोगो के बीच अब कोई शर्म नहीं बची थी
इस पहली ही रात के साथ हम दोनों एक दूजे के जिस्म में ज्यादा से ज्यादा समाकर एक दूजे को पूरी तरह से अपनाना चाहते थे तो बस हम बढ़ते ही जा रहे थे कुछ नया कुछ और कुछ ज्यादा करने को
और इसके लिए हम दोनों ही कब से बेक़रार भी तो थे
फिर संकोच भला किस बात का हम लोग बेशर्मी की हर हद पार करने जा रहे थे
मै वो सब कुछ आपको बता दूंगी तो हो सकता है की आपको गन्दा लगे इसलिए थोड़ा ही बताउंगी की इस स्टेज पे क्या हुआ हाँ लेकिन इतना जरूर बता दू की शादी के तीन महीने बाद भी हम लोग कुछ न कुछ नया करने को रोज ही ढूंढ लेते हैं और हमारी प्यास और बढ़ती ही जा रही है
अच्छा चलो आगे बढ़ती हूँ –
ये बाथरूम की तरफ बड़े तो मैंने इनसे कहा यार शुशु लग रही है चलो पहले कर ले तो इन्होने मुझे अपनी गोदी में पॉट पे बिठा लिया और बोले चल एक साथ करते हैं फिर आगे……….
हम दोनों फ्रेश हो गए साथ साथ…..
साथ साथ ब्रश किया एक दूसरे के दाँतो का एक दूसरे के हाथो से बड़े ही प्यार से और आराम से
फिर हम दोनों ने एक दूसरे को बड़े ही प्यार से आहिस्ता आहिस्ता पूरे जिस्म पर साबुन लगाके नहलाया और पहले साबुन लगाया फिर एक साथ शोवेर के निचे खड़े होके एक दूजे को बड़े ही प्यार से साफ़ किया
सबसे लास्ट में हमदोनों ने एक साथ एक दूसरे के गुप्त अंगो को साबुन लगा के बड़े ही मोहक अंदाज में सहलाते हुए धीरे धीर साफ़ किया
इतना धीरे की हम दोनों फिर से एक साथ excite हो गए और अचानक इन्होने मुझे खड़े खड़े ही कुछ ऐसे अपनी बाहों में उठा के फिक्स किया की मेरी चूत इनके लुनद के ऊपर चढ़ गयी और इस बार एक ही झटके में इन्होने अपना आधा लंड मेरी चूत मैं दाल दिया मुझे कोई खास दर्द नहीं हुआ इस बार तो मेरा इशारा देखकर इन्होने तुरंत ही पूरा लंड अंदर कर दिया
उईई अहा मैं अपनी इस ख़ुशी को रोक नहीं पायी और मुह से ये आवाजे अपने आप ही निकल बैठी
और मेरी आवाजे सुनके इनको और जोश आ गया तो इन्होने अपनी गोदी में एक डॉल की तरह बड़े ही आराम से मुझको अपने लंड के ऊपर नीचे चढ़ाना और उतारना शुरू कर दिया
उफ़ आईईइ अहा उईई अहा मजा आ गया जान अहा चोद डालो न मुझे मैंने ऐसे चीखना शुरू कर दिया
क्योकि मैं देख रही थी की मेरी ऐसी आवाजे निकलने से ना सिर्फ मुझको मजा ज्यादा आ रहा है और ना सिर्फ मैं अपने मन की बात अपने एक्सप्रेशंस इन्हे खुल के दे पा रही थी बल्कि ये भी मुझे जोश में देख के और ज्यादा गरम होके – ये समझते हुए की मुझे कब और किस तरह ज्यादा मजा आ रहा है उसी तरह से मुझे और जोर जोर से चोद रहे थे
वाह क्या मस्त चुदाई हो रही थी – आराम से मैं उनकी गोदी मैं बस दीवार के सहारे टिक्कर जबरदस्त तरीके से चुदवा रही थी जिसकी तो मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी की ये ऐसे भी चोद सकते हैं इतने प्यार और आराम से और इस मजे के साथ उफ़ वाह
मैं भी चुदने का मजा बिलकुल बेशरम होके भरपूर ले रही थी
उफ़ आई उई अहा यह अहा यह यह उह्ह उफ़ आआआऔउउउउउउउउ
ऐसी आवाजो से बाथरूम गूंज रहा था और मैं अपना कंट्रोल खोती जा रही थी
फिर अचानक ही इन्होने मुझे वही फर्श पर नीचे लिटा दिया और अब पूरा ऊपर चढ़के अब ऊपर से जोर जोर से शायद फुल स्पीड में े लगे मैं ज्यादा देर खुद को रोक ना सकी
उफ़ आई बस
अब मेरे दर्द होने सा लगा था क्युकी ये चोद रहे थे पर मैंने अपना पानी छोड दिया था
फिर
इन्होने मेरा मुह देखा तो इन्होने झट से लंड बाहर निकाल लिया
और बहुत तेजी से अपने हाथो से रगड़कर अपना लंड झाड़ लिया और इनकी पोजीशन ऐसी थी की इनका सारा माल मेरे मुह बूब्स और पेट पे गिरा इनका गरम गरम लावा मुझे बड़ा अच्छा लगा
जहां जहां ये जिस्म पे गिरा हम दोनों ने जिस्म के हर उस हिस्से की मालिश उस सीमेन से की
फिर ये थोड़ी देर मेरे ऊपर चढ़कर लेट गए और मुझे प्यार से सहलाते हुए बोले –
रूपा मैं तुमसे बेइंतिहा प्यार करता हु और तुम्हे भरपूर मजे देना चाहता हु
लेकिन तुम्हारे ऊपर दर्द की एक बूंद भी मुझे बर्दास्त नहीं है जान
रूपा जब तू ठंडी पड़ गयी थी और तुझे दर्द होने लगा था तो मैं तुझे कैसे चोद सकता था यार इसलिए मैंने इसे ऊपर आकर अपने हाथ से कर लिया
रूपा यार देख अगली बार ऐसा अगर कभी हो तो देख ऐसा नहीं करना बल्कि लंड खुद बाहर निकाल के अपने हाथो या मुँह से चोद डालना मुझे तब भी उतना ही मजा आ जायेगा क्युकी मैं तुझे दर्द नहीं दे सकता ठीक है रूपा
ऐसे प्यार करने वाले आशिक़ से चुदवा के कोण लड़की भला जन्नत मैं नहीं खुद को महसूस करेगी और खुद ही दिल से अपना तन ख़ुशी ख़ुशी समर्पित नहीं करेगी
उसी वक़्त मैंने फैसला लिया की आज से अब जब भी ये कभी
मुझे ा चाहेंगे तो मैं अगर गरम नहीं होउंगी तो खुद को खुद अपनी फिंगर्स से गरम कर लूंगी और इन्हे अपनी चूत ख़ुशी ख़ुशी हर बार दूंगी कभी भी ना नहीं कहूँगी और
अगर में इनसे पहले झड गयी तो दर्द चुपचाप बर्दाश्त करके देखूंगी क्योकि मुझे पता है की चूत से निकालकर हाथ मैं लेना इनके लिए कितना मुश्किल है तो मैं इनकी ख़ुशी के लिए अगली बार से दर्द जरूर बर्दाश्त करुँगी और इन्हे चूत का पूरा मजा लेने दूंगी ………………

लेकिन सच तो ये है की १ २ बार के बाद फिर दर्द तो खत्म ही हो गया और बस मजा ही मजा रह गया असल में हुआ क्या और कैसे ये सब कुछ मै आपको धीरे धीरे अपनी अगली कहानियो में बताउंगी सब कुछ अपना सब कुछ आप सबके साथ शेयर करुँगी सब एक एक करके……………..

आज रात ही हमारी टिकट गोवा की बुक थी हनीमून की ……..
आगे की कहानी अगली बार…..
तब तक के लिए आप सभी को आपकी प्यारी रूपा का प्यार भरा चुम्बन
और फिर से एक बात
……..
चोदो चुदाओ लाइफ बनाओ मगर
प्यार से और रजामंदी से ख़ुशी ख़ुशी……………